Language Settings
Select Website Language
newshunt
newshunt

ketan Agarwal Murder Case: आखिर क्यों कातिल बन रही हैं पत्नियां? देशभर में बढ़े मामले, एक्सपर्ट ने खोले हैरान करने वाले राज

2 months ago

Reasons Behind Husband Murder Cases: पिछले कुछ समय से आपको कुछ दिनों के अंतराल पर यह खबर जरूर पढ़ने को मिलती होगी कि उस महिला ने अपने पति की हत्या कर दी. देश में कुछ ऐसे चर्चित केस भी हैं, जिनका उदाहरण दिया जा सकता है. फिर चाहे वह नीले ड्रम हत्याकांड वाली मुस्कान रस्तोगी हो, हनीमून पर पति की हत्या करवा देने वाली सोनम रघुवंशी हो, बेंगलुरु के टेक प्रोफेशनल अतुल सुभाष की आत्महत्या हो या फिर इस समय के सबसे चर्चित केसों में से एक केतन अग्रवाल का मामला हो, जिनको उनकी होने वाली पत्नी सिया गोयल ने अपने साथी चेतन चौधरी के साथ मिलकर मौत के घाट उतार दिया. अगर हम इन सभी केसों पर नजर डालें, तो यह एक पैटर्न सा बनता है कि इस तरह के मामले लगातार बढ़ रहे हैं.

ऐसे में हमारे मन में सवाल उठता है कि आखिर इसके पीछे वह कौन सी सोच या स्थिति जिम्मेदार है, जो इन महिलाओं को ऐसा कदम उठाने के लिए मजबूर कर रही है. आखिर जिन पुरुषों को कोई गलती नहीं, बस सिर्फ शादी कर ली इसलिए मारा जा रहा है, ऐसे मामले क्यों बढ़ते जा रहे हैं. चलिए आपको आपके मन में उठ रहे इन सवालों के जवाब एक-एक करके देते हैं.

लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं

इन घटनाओं के बाद सोशल मीडिया पर महिलाओं को लेकर कई तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं. कुछ लोगों ने, जिनकी संख्या बस कुछ ही होगी, इसे सालों से चली आ रही रूढ़िवादी मानसिकता के खिलाफ महिलाओं की प्रतिक्रिया बताया, तो एक बड़ी आबादी थी, जिसने इस तरह की घटनाओं की निंदा की, भले ही दबे शब्दों में की हो. हालांकि, मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट का मानना है कि ऐसे मामलों को पुरुष बनाम महिला के नजरिए से नहीं, बल्कि मेंटल और इमोशनल समस्याओं के परिणाम के रूप में देखा जाना चाहिए.

इसे भी पढ़ेंः Bedroom Sleeping Tips: बेडरूम में भूलकर भी न करें ये काम, वरना बिगड़ सकती है नींद और सेहत

क्यों बढ़ रहे हैं इस तरह के मामले

नई दिल्ली के लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज के मनोचिकित्सा विभाग के प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष डॉ. शिव प्रसाद ने IANS से बताया कि इन अपराधों को पुरुष या महिला द्वारा किए गए अपराध के रूप में नहीं देखना चाहिए. इन्हें इंसानी त्रासदी के रूप में देखने की जरूरत है, जो इमोशनल असंतुलन, समस्याओं से निपटने के गलत तरीके, सोचने-समझने की क्षमता में कमी और निर्णय लेने की कमजोर क्षमता का परिणाम हो सकते हैं. उन्होंने कहा कि इन घटनाओं को महिलाओं के सशक्तिकरण से जोड़ना पूरी तरह गलत है. "ऐसे मामलों में शामिल महिला किसी सशक्त सोच का प्रतिनिधित्व नहीं करती, बल्कि वह गंभीर साइकोलॉजिकल समस्याओं से जूझ रही हो सकती है. अगर सशक्त महिलाओं को ही इमोशनल रूप से अस्थिर और खतरनाक बताने की कोशिश की जाती है, तो इससे लैंगिक समानता की लंबी लड़ाई को नुकसान पहुंचता है. इसके साथ ही इन घटनाओं के पीछे मौजूद असली वजह यानी मानसिक समस्याओं को भी नजरअंदाज कर दिया जाता है."

कई तरह के दबाव बढ़ रहे हैं

डॉ. प्रसाद के मुताबिक, आज महिलाओं पर आर्थिक, सामाजिक, भावनात्मक और अस्तित्व से जुड़े कई तरह के दबाव बढ़े हैं. कई रिश्तों में क्षमता और अधिकार को लेकर संघर्ष भी देखने को मिलता है. उन्होंने कहा कि जब किसी व्यक्ति के भीतर पुराने मानसिक आघात, छोड़ दिए जाने का डर, भावनाओं पर नियंत्रण की कमी, कम भावनात्मक सहनशीलता और अवास्तविक उम्मीदें जैसी कमजोरियां पहले से मौजूद हों और उनके साथ विश्वासघात, अस्वीकृति, पारिवारिक जिम्मेदारियों का दबाव या अपनी कल्पना जैसी जिंदगी न मिल पाने का एहसास जुड़ जाए, तब हिंसा जैसी घटनाएं सामने आ सकती हैं. इसके अलावा एक्सपर्ट मानते हैं कि अब कपल्स में धैर्य पहले की तुलना में कम हो गया है. इसके साथ ही लोगों को यह भरोसा भी होने लगा है कि वे कानून से बच निकलेंगे.

सोशल मीडिया ने बदला रूप

विशेषज्ञों का मानना है कि आज के रिश्ते सोशल मीडिया और डिजिटल दुनिया से काफी प्रभावित हैं. बाहर से ये रिश्ते जितने मजबूत दिखाई देते हैं, भीतर से उनमें इमोशनल जुड़ाव की कमी हो सकती है. अवास्तविक अपेक्षाएं और पारिवारिक मूल्यों के साथ तालमेल न बैठा पाना भी रिश्तों में अस्थिरता बढ़ा रहा है.

इसे भी पढ़ेंः Alka Yagnik health: किन लोगों को होती है अलका याज्ञनिक वाली बीमारी? जानें इसके लक्षण और बचाव के तरीके

Click here to Read More
Previous Article
Health Risks Of Reheated Oil: कड़ाही में बचा तेल कितने दिन तक इस्तेमाल कर सकते हैं, कब बन जाता है जहर?
Next Article
14-Day Cancer Treatment: भारत में लॉन्च हुई कैंसर की नई दवा, 14 दिनों के डोज में खत्म होगी बीमारी! जानें कितनी है कीमत?

Related जीवन शैली Updates:

Are you sure? You want to delete this comment..! Remove Cancel

Comments (0)

    Leave a comment

    //