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IVF कराने वालों के लिए बड़ी खबर, स्पर्म बैंक और फर्टिलिटी क्लीनिकों के लिए नए नियम तय

2 months ago

आजकल माता-पिता बनने का सपना पूरा करने के लिए बड़ी संख्या में लोग आईवीएफ (IVF) यानी इन विट्रो फर्टिलाइजेशन तकनीक का सहारा ले रहे हैं. देश भर में आईवीएफ और फर्टिलिटी सेंटर्स कुकुरमुत्ते की तरह खुल गए हैं. ऐसे में मरीजों की सुरक्षा और इलाज की क्वालिटी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने बेहद सख्त और अहम कदम उठाया है.

इस संबंध में केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने नया आदेश जारी किया है. इसके मुताबिक, अब केवल उन्हीं फर्टिलिटी क्लीनिकों और स्पर्म बैंकों को आईवीएफ से जुड़ा जरूरी लैब का सामान (कंज्यूमेबल्स) मिलेगा, जो सरकार के बनाए गए नियमों के तहत रजिस्टर्ड हैं.

क्या है CDSCO का नया आदेश?

इस आदेश में साफ कहा गया है कि जो फर्टिलिटी क्लीनिक या स्पर्म बैंक असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (ART) और सरोगेसी कानूनों के तहत रजिस्टर्ड नहीं हैं, वे अब आईवीएफ प्रक्रियाओं में इस्तेमाल होने वाले जरूरी लैब प्रॉडक्ट्स नहीं खरीद पाएंगे. बता दें कि CDSCO देश की वह संस्था है, जो दवाओं और मेडिकल उपकरणों के मानक तय करती है. संस्था ने उन सभी कंपनियों और सप्लायर्स को सख्त निर्देश दिया है कि वे अपना सामान (आईवीएफ प्रोडक्ट्स) केवल मान्यता प्राप्त और रजिस्टर्ड सेंटरों को ही बेचें.

क्यों लिया गया यह फैसला?

CDSCO के ध्यान में यह बात आई थी कि बाजार में आईवीएफ के लिए जरूरी और संवेदनशील प्रॉडक्ट्स उन क्लीनिकों को भी बेचे जा रहे हैं, जिन्होंने रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है. यह बेहद गंभीर समस्या है.  बिना रजिस्ट्रेशन वाले क्लीनिकों में अक्सर सही मानकों का पालन नहीं होता है. CDSCO ने साफ शब्दों में कहा है कि गैर-पंजीकृत संस्थानों को इस तरह के मेडिकल प्रॉडक्ट्स की सप्लाई करने से मरीजों की सेहत और उनकी सुरक्षा पर खतरा मंडराने लगता है, जिसे रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है.

किन चीजों की सप्लाई पर लगेगी रोक?

इस नए नियम के तहत आईवीएफ प्रक्रिया में काम आने वाली कई जरूरी चीजों की सप्लाई बिना रजिस्ट्रेशन वाले क्लीनिकों को नहीं की जाएगी. 

  • IVF मीडिया (IVF Media): यह खास तरह का केमिकल या घोल होता है. जब लैब में माता-पिता के अंडाणु (Egg) और शुक्राणु (Sperm) को मिलाकर भ्रूण (Embryo) बनाया जाता है तो उसे इसी घोल में सुरक्षित रखा जाता है और डिवेलप किया जाता है.
  • क्रायोप्रिजर्वेशन मीडिया (Cryopreservation Media): इसका इस्तेमाल भ्रूण या स्पर्म को फ्रीज करके रखने के लिए किया जाता है.
  • रिएजेंट्स (Reagents): लैब में होने वाले विभिन्न टेस्ट और प्रक्रियाओं में काम आने वाले रसायन.
  • अन्य सामग्रियां (Other Consumables): आईवीएफ के दौरान इस्तेमाल होने वाले अन्य सभी जरूरी उपकरण और सामग्री.

क्या कहते हैं कानूनी नियम?

CDSCO ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि आईवीएफ में इस्तेमाल होने वाले इन सभी प्रॉडक्ट्स को मेडिकल डिवाइसेज रूल्स, 2017 (Medical Devices Rules, 2017) के तहत विनियमित किया जाता है. इसका मतलब है कि इन्हें बनाने या विदेश से मंगाने के लिए लाइसेंस होना बेहद जरूरी है. वहीं, देश में सभी आईवीएफ क्लीनिकों और स्पर्म बैंकों को दो मुख्य कानूनों असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (रेगुलेशन) एक्ट 2021 और सरोगेसी (रेगुलेशन) एक्ट 2021 के तहत अपना रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है.

ये भी पढ़ें: क्या पहली बार में ही सक्सेस हो जाता है IVF, क्या होता है प्रॉसेस और कितना आता है खर्चा?

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